उल्लू को कई संस्कृतियों में गूढ़ ज्ञान का संरक्षक माना गया।
भारत में यह लक्ष्मी का वाहन है। धन और विवेक का प्रतीक है।
रात में देखने की शक्ति ध्यान साधना का प्रतीक बनी।
तंत्र में यह ‘अंधेरे में सत्य देखने’ का संकेत है। मन की रोशनी का संदेश देता है।
उल्लू की उपस्थिति को शुभ माना गया है।
यह ऊर्जा के बदलाव का संकेत मन जाता था। ये लोकमान्यताएँ हैं, अंधविश्वास नहीं।
उल्लू का उपयोग तांत्रिक साधना में प्रतीक मात्र था।
ध्यान केंद्रित करने का साधन। इसमें पक्षी को कोई हानि नहीं पहुँचती थी।
आज के विशेषज्ञ केवल प्रतीकात्मक उपयोग की सलाह देते हैं।
चित्र, प्रतीक, मूर्ति पर्याप्त है। प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण सर्वोपरि है।
उल्लू हमें सिखाता है—
अंधेरे में भी प्रकाश ढूंढना। ज्ञान, जागरण और विवेक की राह अपनाना।